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कनुप्रिया (मंजरी परिणय – तुम मेरे कौन हो?) (via Hindi Poetry Collection)

August 20, 2011

the eternal quest!

तुम मेरे कौन हो कनु मैं तो आज तक नहीं जान पायीबार-बार मुझ से मेरे मन ने आग्रह से, विस्मय से, तन्मयता से पूछा है- 'यह कनु तेरा है कौन? बूझ तो!'बार-बार मुझ से मेरी सखियों ने व्यंग्य से, कटाक्ष से, कुटिल संकेत से पूछा है- 'कनु तेरा कौन है री, बोलती क्यों नहीं?'बार-बार मुझ से मेरे गुरुजनों ने कठोरता से, अप्रसन्नता से, रोष से पूछा है- 'यह कान्ह आखिर तेरा है कौन?'मैं तो आज तक कुछ नहीं बता पायी तुम मेरे सचमुच कौन हो कनु!अक्सर जब तुम ने माला गूँथने के लि … Read More

via Hindi Poetry Collection

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